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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.51.4 
एष ते नृपते पुत्र: श्रीमान् जातो बलाधिक:।
तस्मादस्मान्न भेतव्यमव्यग्र: पाहि वै शिशुम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! आपका यह पुत्र अत्यन्त यशस्वी और पराक्रमी है, अतः आपको इससे भय नहीं होना चाहिए। आप निश्चिंत होकर इस बालक का पालन-पोषण करें।'
 
'King! This son of yours is very prosperous and very powerful, hence you should not be afraid of him. You take care of this child with peace of mind. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)