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श्लोक 2.51.25  |
भीष्म उवाच
एवमेष नृप: पाप: शिशुपाल: सुमन्दधी:।
त्वां समाह्वयते वीर गोविन्दवरदर्पित:॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्म कहते हैं - हे वीर भीमसेन! यह पापी, मन्दबुद्धि राजा शिशुपाल भगवान श्रीकृष्ण के वरदान से कुपित होकर आपको युद्ध के लिए ललकार रहा है। |
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| Bhishma says - O brave Bhimasena! This sinful king Sisupala of dull intellect is infuriated by the boon given by Lord Krishna and is challenging you for a battle. |
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इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि शिशुपालवधपर्वणि शिशुपालवृत्तान्तकथने त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत शिशुपालवधपर्वमें शिशुपालवृत्तान्तवर्णनविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥
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