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श्लोक 2.51.24  |
श्रीकृष्ण उवाच
अपराधशतं क्षाम्यं मया ह्यस्य पितृष्वस:।
पुत्रस्य ते वधार्हस्य मा त्वं शोके मन: कृथा:॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| श्रीकृष्ण बोले - बुआ! यदि तुम्हारा पुत्र अपने दोषों के कारण मेरे द्वारा वध के योग्य भी हो, तो भी मैं उसके सौ अपराधों को क्षमा कर दूँगा। तुम मन में शोक न करो॥ 24॥ |
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| Shri Krishna said - Aunt! Even if your son deserves to be killed by me due to his faults, I will forgive his hundred crimes. Do not grieve in your heart.॥ 24॥ |
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