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mahabharat 2.51.24: श्रीकृष्ण बोले - बुआ! यदि तुम्हारा पुत्र अपने दोषों के कारण मेरे द्वारा वध के योग्य भी हो, तो भी मैं उसके सौ अपराधों को क्षमा कर दूँगा। तुम मन में शोक न करो॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.51.24 
श्रीकृष्ण उवाच
अपराधशतं क्षाम्यं मया ह्यस्य पितृष्वस:।
पुत्रस्य ते वधार्हस्य मा त्वं शोके मन: कृथा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - बुआ! यदि तुम्हारा पुत्र अपने दोषों के कारण मेरे द्वारा वध के योग्य भी हो, तो भी मैं उसके सौ अपराधों को क्षमा कर दूँगा। तुम मन में शोक न करो॥ 24॥
 
Shri Krishna said - Aunt! Even if your son deserves to be killed by me due to his faults, I will forgive his hundred crimes. Do not grieve in your heart.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)