श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.51.23 
शिशुपालस्यापराधान् क्षमेथास्त्वं महाबल।
मत्कृते यदुशार्दूल विद्धॺेनं मे वरं प्रभो॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'महाबली यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण! मेरे लिए शिशुपाल के समस्त अपराधों को क्षमा कर दीजिए। प्रभु! इसे मेरा अभीष्ट वर समझिए।'॥23॥
 
'Mahabali Yadukultilak Sri Krishna! For my sake please forgive all the crimes of Shishupal. Prabhu! Consider this as my desired boon.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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