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श्लोक 2.51.23  |
शिशुपालस्यापराधान् क्षमेथास्त्वं महाबल।
मत्कृते यदुशार्दूल विद्धॺेनं मे वरं प्रभो॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| 'महाबली यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण! मेरे लिए शिशुपाल के समस्त अपराधों को क्षमा कर दीजिए। प्रभु! इसे मेरा अभीष्ट वर समझिए।'॥23॥ |
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| 'Mahabali Yadukultilak Sri Krishna! For my sake please forgive all the crimes of Shishupal. Prabhu! Consider this as my desired boon.'॥ 23॥ |
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