श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.51.22 
शक्यं वा यदि वाशक्यं करिष्यामि वचस्तव।
एवमुक्ता तत: कृष्णमब्रवीद् यदुनन्दनम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘चाहे वह संभव हो या असंभव, मैं आपके वचन का पालन अवश्य करूँगा।’ यह आश्वासन पाकर यदुनन्दन श्रुतश्रवा ने श्रीकृष्ण से कहा- 22॥
 
'Whether it is possible or impossible, I will definitely follow your word.' On receiving this assurance, Shrutashrava Yadunandan said to Shri Krishna - 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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