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श्लोक 2.51.21  |
मा भैस्त्वं देवि धर्मज्ञे न मत्तोऽस्ति भयं तव।
ददामि कं वरं किं च करवाणि पितृष्वस:॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| हे देवी! धर्म को जानने वाली! आप डरें नहीं। आपको मुझसे कोई भय नहीं है। बुआ! आप बताएँ कि मैं आपको कौन-सा वर दूँ? आपके कौन-से कार्य में आपकी सहायता करूँ?॥ 21॥ |
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| ‘Goddess! Knower of Dharma! Do not be afraid. You have nothing to fear from me. Aunt! You tell me, which boon should I give you? Which of your tasks should I help you accomplish?॥ 21॥ |
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