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mahabharat 2.51.18: जैसे ही बालक को गोद में रखा, उसकी दोनों भुजाएँ गिर गईं और उसके माथे पर की आँख भी वहीं लुप्त हो गई ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.51.18 
न्यस्तमात्रस्य तस्याङ्के भुजावभ्यधिकावुभौ।
पेततुस्तच्च नयनं न्यमज्जत ललाटजम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही बालक को गोद में रखा, उसकी दोनों भुजाएँ गिर गईं और उसके माथे पर की आँख भी वहीं लुप्त हो गई ॥18॥
 
As soon as the child was placed in his lap, both his arms dropped and the eye on his forehead also disappeared there. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)