vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन
»
श्लोक 13-14h
श्लोक
2.51.13-14h
एवं राजसहस्राणां पृथक्त्वेन यथाक्रमम्॥ १३॥
शिशुरङ्कसमारूढो न तत् प्राप निदर्शनम्।
अनुवाद
इस प्रकार वह बालक एक के बाद एक हजारों राजाओं की गोद में रखा गया, परंतु कहीं भी मृत्यु का कोई चिह्न दिखाई नहीं दिया ॥13 1/2॥
In this manner the child was placed in the laps of thousands of kings one after the other, but no signs of death were seen anywhere. ॥ 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×