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mahabharat 2.51.1: भीष्मजी बोले- भीमसेन! सुनो, जब शिशुपाल चेदिराज दमघोष के कुल में उत्पन्न हुआ, तब उसके तीन नेत्र और चार भुजाएँ थीं। वह रोने के स्थान पर गधे के रेंकने के समान शब्द करता और जोर से दहाड़ता था॥1॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.51.1 
भीष्म उवाच
चेदिराजकुले जातस्त्र्यक्ष एष चतुर्भुज:।
रासभारावसदृशं ररास च ननाद च॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- भीमसेन! सुनो, जब शिशुपाल चेदिराज दमघोष के कुल में उत्पन्न हुआ, तब उसके तीन नेत्र और चार भुजाएँ थीं। वह रोने के स्थान पर गधे के रेंकने के समान शब्द करता और जोर से दहाड़ता था॥1॥
 
Bhishmaji said- Bhimsena! Listen, when Shishupal was born in the family of Chediraja Damghosha, he had three eyes and four arms. Instead of crying, he made a sound like the braying of a donkey and roared loudly.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)