श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 50: शिशुपालकी बातोंपर भीमसेनका क्रोध और भीष्मजीका उन्हें शान्त करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.50.7 
इदं त्वाश्चर्यभूतं मे यदिमे पाण्डवास्त्वया।
अपकृष्टा: सतां मार्गान्मन्यन्ते तच्च साध्विति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मेरे लिए सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि इन पाण्डवों को भी आपने ही सही मार्ग से भटकाया है; इसलिए वे भी कृष्ण के इस कार्य को सही मानते हैं॥ 7॥
 
The most surprising thing to me is that these Pandavas too have been led astray by you from the right path; therefore they too consider this action of Krishna to be right. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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