श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  2.5.99 
कच्चित्तव गृहेऽन्नानि स्वादून्यश्नन्ति वै द्विजा:।
गुणवन्ति गुणोपेतास्तवाध्यक्षं सदक्षिणम्॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
क्या आपके महल में सदाचारी ब्राह्मण आपकी आँखों के सामने स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन करते हैं? और भोजन के बाद उन्हें दक्षिणा दी जाती है? 99॥
 
Do virtuous brahmins eat tasty and nutritious food in front of your eyes in your palace? And after the meal they are given Dakshina? 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)