Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.5.97: क्या आप सभी प्रकार के ज्ञानों का उनके गुणों के अनुसार आदर करते हैं? क्या आप ब्राह्मणों और ऋषियों की सेवा और पूजा करते हैं? जो आपके लिए शुभ और कल्याणकारी है। आप इन ब्राह्मणों को सदैव दक्षिणा देते हैं, है न? क्योंकि इससे स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है॥ 97॥ | mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्चित् ते सर्वविद्यासु गुणतोऽर्चा प्रवर्तते।
ब्राह्मणानां च साधूनां तव नै:श्रेयसी शुभा।
दक्षिणास्त्वं ददास्येषां नित्यं स्वर्गापवर्गदा:॥ ९७॥
अनुवाद
क्या आप सभी प्रकार के ज्ञानों का उनके गुणों के अनुसार आदर करते हैं? क्या आप ब्राह्मणों और ऋषियों की सेवा और पूजा करते हैं? जो आपके लिए शुभ और कल्याणकारी है। आप इन ब्राह्मणों को सदैव दक्षिणा देते हैं, है न? क्योंकि इससे स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति होती है॥ 97॥
Do you have respect for all kinds of knowledge according to their qualities? Do you serve and worship Brahmins and sages? Which is auspicious and beneficial for you. You always give dakshina to these Brahmins, don't you? Because it leads to attainment of heaven and salvation.॥ 97॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥