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mahabharat 2.5.95: क्या कोई दुर्बल शत्रु, जो पहले आपके द्वारा बलपूर्वक सताया गया था (किन्तु मारा नहीं गया था), अब मंत्रणा के बल से अथवा मंत्रणा और सैन्यबल दोनों के बल से बलवान होकर सिर उठा रहा है ॥95॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.5.95 
कच्चिन्न दुर्बल: शत्रुर्बलेन परिपीडित:।
मन्त्रेण बलवान् कश्चिदुभाभ्यां च कथंचन॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
क्या कोई दुर्बल शत्रु, जो पहले आपके द्वारा बलपूर्वक सताया गया था (किन्तु मारा नहीं गया था), अब मंत्रणा के बल से अथवा मंत्रणा और सैन्यबल दोनों के बल से बलवान होकर सिर उठा रहा है ॥95॥
 
Is any weak enemy, who was earlier tormented by you with force (but was not killed), now becoming stronger by the power of consultation or by the power of both consultation and military power, raising his head? ॥95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)