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mahabharat 2.5.94: क्या तुम्हारे नगर और राष्ट्र के लोग संगठित होकर तुम्हारा विरोध करते हैं? क्या शत्रुओं ने उन्हें किसी प्रकार रिश्वत देकर खरीद लिया है?॥ 94॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.5.94 
कच्चित् पौरा न सहिता ये च ते राष्ट्रवासिन:।
त्वया सह विरुध्यन्ते परै: क्रीता: कथंचन॥ ९४॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम्हारे नगर और राष्ट्र के लोग संगठित होकर तुम्हारा विरोध करते हैं? क्या शत्रुओं ने उन्हें किसी प्रकार रिश्वत देकर खरीद लिया है?॥ 94॥
 
Do the people of your city and nation unite and oppose you? Have the enemies somehow bought them off by bribing them?॥ 94॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)