Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.5.92: हे मनुष्यों के स्वामी! क्या आप लोभ, मोह या अभिमान के कारण अपने पास शवयात्रा के लिए आए हुए व्यक्ति (भिखारी) और याचक (जो राजा द्वारा दिए गए उपकार के रुक जाने से दुःखी है और उसे पुनः प्राप्त करना चाहता है) की ओर देखते भी नहीं?॥ 92॥ | mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्चिन्न लोभान्मोहाद् वा मानाद् वापि विशाम्पते।
अर्थिप्रत्यर्थिन: प्राप्तान् न पश्यसि कथंचन॥ ९२॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! क्या आप लोभ, मोह या अभिमान के कारण अपने पास शवयात्रा के लिए आए हुए व्यक्ति (भिखारी) और याचक (जो राजा द्वारा दिए गए उपकार के रुक जाने से दुःखी है और उसे पुनः प्राप्त करना चाहता है) की ओर देखते भी नहीं?॥ 92॥
O Lord of men! Is it not the case that due to greed, infatuation or pride you do not even look at the person who has come to you for the funeral procession (beggar) and the applicant (who is sad because the favour given by the king has been stopped and who wants to get it back again)?॥ 92॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥