श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.5.91 
कच्चिद् वैद्याश्चिकित्सायामष्टाङ्गायां विशारदा:।
सुहृदश्चानुरक्ताश्च शरीरे ते हिता: सदा॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
आपके वैद्य तो अष्टांग चिकित्सा में कुशल, दयालु, प्रेममय और आपके शरीर को स्वस्थ रखने के प्रयत्न में सदैव तत्पर रहते हैं, है न? 91॥
 
Your doctor is skilled in Ashtanga Chikitsa, benevolent, loving and always engaged in trying to keep your body healthy, isn't he? 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)