Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.5.90: कुन्तीकुमार! क्या तुम औषधियों के सेवन से, आहार-विहार आदि के नियमों का पालन करके अपने शरीर के कष्टों को तथा वृद्धजनों की सेवा और सज्जनों की संगति करके अपने मानसिक कष्टों को सदैव दूर रखते हो?॥90॥ | mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्चिच्छारीरमाबाधमौषधैर्नियमेन वा।
मानसं वृद्धसेवाभि: सदा पार्थापकर्षसि॥ ९०॥
अनुवाद
कुन्तीकुमार! क्या तुम औषधियों के सेवन से, आहार-विहार आदि के नियमों का पालन करके अपने शरीर के कष्टों को तथा वृद्धजनों की सेवा और सज्जनों की संगति करके अपने मानसिक कष्टों को सदैव दूर रखते हो?॥90॥
Kuntikumar! Do you always keep away your bodily pains by taking medicines or following rules of diet and food etc. and your mental anguish by serving the elderly and associating with good people?॥ 90॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥