श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  2.5.87 
कच्चिदर्थयसे नित्यं मनुष्यान् समलंकृत:।
उत्थाय काले कालज्ञै: सह पाण्डव मन्त्रिभि:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! आप प्रतिदिन समय पर उठते हैं, स्नान आदि करके वस्त्राभूषणों से सुसज्जित होते हैं और समय और स्थान को जानने वाले मंत्रियों के साथ बैठकर प्रजा (याचक या आगन्तुक) की मनोकामना पूर्ण करते हैं, है न? 87॥
 
Pandunandan! You wake up on time every day, after taking bath etc., adorn yourself with clothes and ornaments, and by sitting with ministers who know the time and place, you fulfill the wishes of people (applicants or visitors), don't you? 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)