श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.5.84 
कच्चित् स्त्रिय: सान्त्वयसि कच्चित् ताश्च सुरक्षिता:।
कच्चिन्न श्रद्दधास्यासां कच्चिद् गुह्यं न भाषसे॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम स्त्रियों को सांत्वना देकर उन्हें प्रसन्न नहीं रखते? क्या वे तुम्हारे पास पूर्णतः सुरक्षित हैं? क्या तुम उन पर पूर्ण विश्वास करते हो? और विश्वास करने के बाद क्या तुम उन्हें कोई गुप्त बात बताते हो?॥ 84॥
 
Don't you keep the women happy by consoling them? Are they completely safe with you? Do you trust them completely? And after trusting them, do you tell them any secrets?॥ 84॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)