Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.5.82: क्या नगरों की रक्षा के लिए नगरों के समान ही वीर योद्धाओं को भी ग्रामों में रखा जाता है? क्या सीमावर्ती ग्रामों को भी अन्य ग्रामों के समान सभी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं? और क्या वे सभी प्रान्त, ग्राम और नगर, कर के रूप में एकत्रित धन आपको समर्पित करते हैं?*॥82॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.5.82 
कच्चिन्नगरगुप्त्यर्थं ग्रामा नगरवत् कृता:।
ग्रामवच्च कृता: प्रान्तास्ते च सर्वे त्वदर्पणा:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
क्या नगरों की रक्षा के लिए नगरों के समान ही वीर योद्धाओं को भी ग्रामों में रखा जाता है? क्या सीमावर्ती ग्रामों को भी अन्य ग्रामों के समान सभी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं? और क्या वे सभी प्रान्त, ग्राम और नगर, कर के रूप में एकत्रित धन आपको समर्पित करते हैं?*॥82॥
 
Are the villages also provided with as many valiant warriors as the cities, for the protection of the cities? Are the border villages also provided with all the facilities like the other villages? And do all those provinces, villages and cities surrender the wealth (collected as taxes) to you?*॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)