श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.5.79 
कच्चिन्न भक्तं बीजं च कर्षकस्यावसीदति।
प्रत्येकं च शतं वृद्धॺा ददास्यृणमनुग्रहम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
क्या आपके राज्य के किसानों का अन्न या बीज नष्ट नहीं होता? क्या आप प्रत्येक किसान पर कृपा करके उसे सौ रुपये पर एक रुपया ब्याज सहित ऋण देते हैं?॥ 79॥
 
Does the grain or seed of the farmers of your kingdom not get wasted? Do you show favour to each farmer and give him a loan at one rupee per hundred rupees at interest?॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)