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mahabharat 2.5.77: क्या तुम्हारा राष्ट्र चोरों, लोभियों, राजकुमारों और राज-स्त्रियों से त्रस्त है या स्वयं तुम्हारे द्वारा? क्या तुम्हारे राज्य के किसान संतुष्ट हैं?॥77॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  2.5.77 
कच्चिन्न चौरैर्लुब्धैर्वा कुमारै: स्त्रीबलेन वा।
त्वया वा पीडॺते राष्ट्रं कच्चित् तुष्टा: कृषीवला:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम्हारा राष्ट्र चोरों, लोभियों, राजकुमारों और राज-स्त्रियों से त्रस्त है या स्वयं तुम्हारे द्वारा? क्या तुम्हारे राज्य के किसान संतुष्ट हैं?॥77॥
 
Is your nation being troubled by thieves, greedy people, princes, royal women or by you yourself? Are the farmers of your kingdom satisfied?॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)