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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना
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श्लोक 76
श्लोक
2.5.76
कच्चिन्न लुब्धाश्चौरा वा वैरिणो वा विशाम्पते।
अप्राप्तव्यवहारा वा तव कर्मस्वनुष्ठिता:॥ ७६॥
अनुवाद
राजा! क्या आपने अपने काम में ऐसे लोगों को नहीं लगाया है जो लोभी, चोर, शत्रु अथवा व्यावहारिक अनुभव से सर्वथा रहित हैं?॥ 76॥
King! Have you not employed such people in your work who are greedy, thieves, enemies or who are completely devoid of practical experience?॥ 76॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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