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mahabharat 2.5.70: क्या आपके सेवक प्रातःकाल (जो धार्मिक आचरण का समय है) आपसे यह प्रस्ताव नहीं करते कि आप अपना समय और धन शराब, जुआ, खेल और स्त्री आदि दुर्व्यसनों में नष्ट करें? 70॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.5.70 
कच्चिन्न पाने द्यूते वा क्रीडासु प्रमदासु च।
प्रतिजानन्ति पूर्वाह्णे व्ययं व्यसनजं तव॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
क्या आपके सेवक प्रातःकाल (जो धार्मिक आचरण का समय है) आपसे यह प्रस्ताव नहीं करते कि आप अपना समय और धन शराब, जुआ, खेल और स्त्री आदि दुर्व्यसनों में नष्ट करें? 70॥
 
Don't your servants propose to you in the morning (which is the time of religious conduct) to waste your time and money in vices like alcohol, gambling, sports and girls etc.? 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)