श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.5.67 
कच्चिदभ्यवहार्याणि गात्रसंस्पर्शनानि च।
घ्रेयाणि च महाराज रक्षन्त्यनुमतास्तव॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके भोजन, पहनने के वस्त्र और सुगन्धित पदार्थों की रक्षा तो विश्वसनीय पुरुष ही करते हैं न?॥67॥
 
Maharaj! Your food items, clothes to wear and the fragrant substances you use for smelling are protected by trusted men only, aren't they?॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)