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mahabharat 2.5.66: क्या आपके बहुत से अधिकारी आपके और शत्रु राष्ट्रों में जगह-जगह घूमकर प्रजा को वश में करने, कर लेने आदि के उद्देश्य पूरे करते हैं और अपने-अपने पक्ष के राष्ट्र और प्रजा की रक्षा में सम्मिलित होते हैं?॥ 66॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.5.66 
कच्चित् स्वपरराष्ट्रेषु बहवोऽधिकृतास्तव।
अर्थान् समधितिष्ठन्ति रक्षन्ति च परस्परम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
क्या आपके बहुत से अधिकारी आपके और शत्रु राष्ट्रों में जगह-जगह घूमकर प्रजा को वश में करने, कर लेने आदि के उद्देश्य पूरे करते हैं और अपने-अपने पक्ष के राष्ट्र और प्रजा की रक्षा में सम्मिलित होते हैं?॥ 66॥
 
Do many of your officers roam from place to place in your own and enemy nations, accomplishing the purposes of subduing the people, taking taxes etc. and join together in protecting the nation and the people of their own side?॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)