Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.5.62: शत्रुओं पर आक्रमण करने से पूर्व, यदि आपके साम, दान, भेद और दण्ड ये चारों गुण उचित रीति से प्रयोग किए जाएँ, तो वे उन शत्रुओं तक ठीक प्रकार से पहुँचते हैं न? (क्योंकि शत्रुओं को वश में करने के लिए इनका प्रयोग आवश्यक है।)॥62॥ | mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कच्चित् ते यास्यत: शत्रून् पूर्वं यान्ति स्वनुष्ठिता:।
साम दानं च भेदश्च दण्डश्च विधिवद् गुणा:॥ ६२॥
अनुवाद
शत्रुओं पर आक्रमण करने से पूर्व, यदि आपके साम, दान, भेद और दण्ड ये चारों गुण उचित रीति से प्रयोग किए जाएँ, तो वे उन शत्रुओं तक ठीक प्रकार से पहुँचते हैं न? (क्योंकि शत्रुओं को वश में करने के लिए इनका प्रयोग आवश्यक है।)॥62॥
Before you attack your enemies, your four qualities of Sama, Dana, Bhed and Danda, which are used properly, reach those enemies in a proper manner, don't they? (Because their use is necessary to subdue the enemies.)॥ 62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥