श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  2.5.55 
कच्चिद् दारान्मनुष्याणां तवार्थे मृत्युमीयुषाम्।
व्यसनं चाभ्युपेतानां बिभर्षि भरतर्षभ॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो लोग आपके लिए सहर्ष मृत्यु को चुन लेते हैं अथवा महान् संकट में पड़ जाते हैं, उनकी सन्तानों की आप रक्षा करते हैं न?॥ 55॥
 
O best of the Bharatas! You protect the children of those who gladly choose death for your sake or fall into great trouble, don't you?॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)