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mahabharat 2.5.47: क्या तुम्हारा सेनापति हर्ष और उत्साह से युक्त, वीर, बुद्धिमान, धैर्यवान, धर्मात्मा, कुलीन, स्वामीभक्त और अपने कार्य में कुशल है? 4 7॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.5.47 
कच्चिद्‍धृष्टश्च शूरश्च मतिमान् धृतिमाञ्छुचि:।
कुलीनश्चानुरक्तश्च दक्ष: सेनापतिस्तथा॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम्हारा सेनापति हर्ष और उत्साह से युक्त, वीर, बुद्धिमान, धैर्यवान, धर्मात्मा, कुलीन, स्वामीभक्त और अपने कार्य में कुशल है? 4 7॥
 
Is your commander full of joy and enthusiasm, brave, intelligent, patient, pious, noble, devoted to his master and skilled in his work? 4 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)