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mahabharat 2.5.46: जिस प्रकार एक पवित्र पुजारी एक पतित पुजारी का तिरस्कार करता है और स्त्रियाँ एक ऐसे पुरुष का तिरस्कार करती हैं जो व्यभिचारी है, क्या लोग आपका अनादर करते हैं क्योंकि आप अत्यधिक कर लगाते हैं?   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.5.46 
कच्चित् त्वां नावजानन्ति याजका: पतितं यथा।
उग्रप्रतिग्रहीतारं कामयानमिव स्त्रिय:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार एक पवित्र पुजारी एक पतित पुजारी का तिरस्कार करता है और स्त्रियाँ एक ऐसे पुरुष का तिरस्कार करती हैं जो व्यभिचारी है, क्या लोग आपका अनादर करते हैं क्योंकि आप अत्यधिक कर लगाते हैं?
 
Just as a holy priest disdains a fallen priest and women disdain a man who has promiscuity, do the people disrespect you because you levy excessive taxes harshly?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)