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mahabharat 2.5.37: यदि एक भी मंत्री बुद्धिमान, वीर, संयमी और चतुर हो तो वह राजा या राजकुमार को अपार धन प्राप्ति में सहायता करता है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.5.37 
एकोऽप्यमात्यो मेधावी शूरो दान्तो विचक्षण:।
राजानं राजपुत्रं वा प्रापयेन्महतीं श्रियम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि एक भी मंत्री बुद्धिमान, वीर, संयमी और चतुर हो तो वह राजा या राजकुमार को अपार धन प्राप्ति में सहायता करता है ॥37॥
 
If even one minister is intelligent, brave, self-controlled and clever, then he helps the king or prince acquire immense wealth. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)