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mahabharat 2.5.35: तुम हजारों मूर्खों के बदले एक ही विद्वान को खरीदते हो, है न? अर्थात् उसे आदरपूर्वक स्वीकार करते हो, है न? क्योंकि आर्थिक संकट के समय विद्वान् पुरुष ही महान कल्याण कर सकता है ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.5.35 
कच्चित् सहस्रैर्मूर्खाणामेकं क्रीणासि पण्डितम्।
पण्डितो ह्यर्थकृच्छ्रेषु कुर्यान्नि:श्रेयसं परम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तुम हजारों मूर्खों के बदले एक ही विद्वान को खरीदते हो, है न? अर्थात् उसे आदरपूर्वक स्वीकार करते हो, है न? क्योंकि आर्थिक संकट के समय विद्वान् पुरुष ही महान कल्याण कर सकता है ॥35॥
 
You buy only one scholar instead of thousands of fools, right? That is, you accept it respectfully, right? Because only a learned man can do great welfare in times of financial crisis. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)