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mahabharat 2.5.30: (कोई भी गुप्त मंत्रणा दो-चार कानों तक ही गुप्त रहती है; छः कानों तक पहुँचते ही वह प्रकट हो जाती है। अतः मैं पूछ रहा हूँ, क्या आप किसी गहन विषय पर अकेले ही चर्चा करते हैं या बहुत से लोगों के साथ बैठकर विचार-विमर्श करते हैं? क्या ऐसा होता है कि आपके द्वारा निश्चित की गई गुप्त मंत्रणा प्रकट होकर शत्रु के राज्य तक फैल जाती है?॥30॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.5.30 
कच्चिन्मन्त्रयसे नैक: कच्चिन्न बहुभि: सह।
कच्चित् ते मन्त्रितो मन्त्रो न राष्ट्रं परिधावति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
(कोई भी गुप्त मंत्रणा दो-चार कानों तक ही गुप्त रहती है; छः कानों तक पहुँचते ही वह प्रकट हो जाती है। अतः मैं पूछ रहा हूँ, क्या आप किसी गहन विषय पर अकेले ही चर्चा करते हैं या बहुत से लोगों के साथ बैठकर विचार-विमर्श करते हैं? क्या ऐसा होता है कि आपके द्वारा निश्चित की गई गुप्त मंत्रणा प्रकट होकर शत्रु के राज्य तक फैल जाती है?॥30॥
 
(Any secret advice remains secret only between two to four ears; as soon as it reaches six ears, it is leaked. So I am asking, do you discuss any deep topic alone or do you sit with many people and discuss it? Does it happen that the secret advice decided by you gets leaked and spreads to the enemy's kingdom?॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)