श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.5.29 
कच्चिन्निद्रावशं नैषि कच्चित् काले विबुद्धॺसे।
कच्चिच्चापररात्रेषु चिन्तयस्यर्थमर्थवित्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम बेवक्त सो जाते हो? तुम समय पर जागते हो, है न? तुम अर्थशास्त्र के अच्छे जानकार हो। तुम रात्रि के उत्तरार्ध में जागकर अपने धन (आवश्यक कर्तव्य और कल्याण) के बारे में सोचते हो, है न?*॥29॥
 
Do you fall asleep at odd hours? You wake up on time, don't you? You are well versed in economics. You wake up in the later part of the night and think about your wealth (essential duties and welfare), don't you?*॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)