श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.5.28 
कच्चित् संवृतमन्त्रैस्तैरमात्यै: शास्त्रकोविदै:।
राष्ट्रं सुरक्षितं तात शत्रुभिर्न विलुप्यते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! क्या तुम्हारा राष्ट्र उन विद्वान् गुप्तचरों द्वारा सुरक्षित है जो मन्त्रों को गुप्त रखते हैं? क्या वह शत्रुओं द्वारा नष्ट नहीं हो रहा है?॥28॥
 
O dear! Is your nation protected by those learned secretaries who keep the mantras secret? Is it not being destroyed by the enemies?॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)