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mahabharat 2.5.22: हे विजेताओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर, अपने और शत्रु के बल को अच्छी तरह जानकर, यदि शत्रु बलवान हो तो उसके साथ संधि करके अपने धन और कोष की वृद्धि के लिए आठ कर्म करते हो?॥22॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.5.22 
कच्चिदात्मानमन्वीक्ष्य परांश्च जयतां वर।
तथा संधाय कर्माणि अष्टौ भारत सेवसे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे विजेताओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर, अपने और शत्रु के बल को अच्छी तरह जानकर, यदि शत्रु बलवान हो तो उसके साथ संधि करके अपने धन और कोष की वृद्धि के लिए आठ कर्म करते हो?॥22॥
 
Yudhishthira, the best of the conquerors, having understood well your own and the enemy's strength, do you maintain a treaty with the enemy if he is strong and perform the eight* deeds for the increase of your wealth and treasury?॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)