Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.5.17: नारदजी बोले - "हे राजन! क्या आपका धन आपके भरण-पोषण (यज्ञ, दान और परिवार की रक्षा जैसे आवश्यक कार्यों के लिए) के लिए पर्याप्त है? क्या आपका मन प्रसन्नतापूर्वक धर्म में लगा रहता है? क्या आपको इच्छानुसार सुख और भोग प्राप्त होते हैं? क्या आपका मन (भगवान के चिंतन में लगा हुआ) अन्य विचारों से प्रभावित या विचलित नहीं होता?"॥17॥ | mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारद उवाच
कच्चिदर्थाश्च कल्पन्ते धर्मे च रमते मन:।
सुखानि चानुभूयन्ते मनश्च न विहन्यते॥ १७॥
अनुवाद
नारदजी बोले - "हे राजन! क्या आपका धन आपके भरण-पोषण (यज्ञ, दान और परिवार की रक्षा जैसे आवश्यक कार्यों के लिए) के लिए पर्याप्त है? क्या आपका मन प्रसन्नतापूर्वक धर्म में लगा रहता है? क्या आपको इच्छानुसार सुख और भोग प्राप्त होते हैं? क्या आपका मन (भगवान के चिंतन में लगा हुआ) अन्य विचारों से प्रभावित या विचलित नहीं होता?"॥17॥
Narada said, "O King! Is your wealth sufficient for your maintenance (of essential works like yajna, charity and protection of the family)? Is your mind happily engaged in Dharma? Do you get pleasures and enjoyments as per your desire? Is your mind (engaged in the contemplation of God) not affected or distracted (by any other thoughts)?"॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥