Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.5.13-15: पाण्डवों में श्रेष्ठ और समस्त धर्मों के ज्ञाता राजा युधिष्ठिर, नारद मुनि को आते देखकर, अपने भाइयों सहित सहसा उठकर प्रेम, विनय और विनम्रता से उनका स्वागत करने लगे। धर्मज्ञ राजा ने उन्हें उनके योग्य आसन प्रदान करके, रत्नों से उनकी पूजा की, उन्हें गौ, मधु और जल का प्रसाद दिया। उनकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करके उन्हें संतुष्ट किया। | mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमागतमृषिं दृष्ट्वा नारदं सर्वधर्मवित्।
सहसा पाण्डवश्रेष्ठ: प्रत्युत्थायानुजै: सह॥ १३॥
अभ्यवादयत प्रीत्या विनयावनतस्तदा।
तदर्हमासनं तस्मै सम्प्रदाय यथाविधि॥ १४॥
गां चैव मधुपर्कं च सम्प्रदायार्घ्यमेव च।
अर्चयामास रत्नैश्च सर्वकामैश्च धर्मवित्॥ १५॥
अनुवाद
पाण्डवों में श्रेष्ठ और समस्त धर्मों के ज्ञाता राजा युधिष्ठिर, नारद मुनि को आते देखकर, अपने भाइयों सहित सहसा उठकर प्रेम, विनय और विनम्रता से उनका स्वागत करने लगे। धर्मज्ञ राजा ने उन्हें उनके योग्य आसन प्रदान करके, रत्नों से उनकी पूजा की, उन्हें गौ, मधु और जल का प्रसाद दिया। उनकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करके उन्हें संतुष्ट किया।
King Yudhishthira, the best of the Pandavas and a knower of all religious practices, on seeing the sage Narada arriving, got up suddenly along with his brothers and greeted him with love, humility and politeness. Assigning a seat to him befitting him, the king who knew the religion worshipped him with precious stones and offered him a cow, honey and offerings of water. He satisfied him by fulfilling all his desires.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥