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mahabharat 2.5.128: युधिष्ठिर बोले - "देवऋषि! आपने जैसा परामर्श दिया है, वैसा ही मैं करूँगा। आपके प्रवचन से मेरी बुद्धि और भी बढ़ गई है। ऐसा कहकर राजा युधिष्ठिर ने तद्नुसार कार्य किया और इस प्रकार उन्हें समुद्रपर्यन्त पृथ्वी का राज्य प्राप्त हो गया॥128॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.5.128 
युधिष्ठिर उवाच
एवं करिष्यामि यथा त्वयोक्तं
प्रज्ञा हि मे भूय एवाभिवृद्धा।
उक्त्वा तथा चैव चकार राजा
लेभे महीं सागरमेखलां च॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "देवऋषि! आपने जैसा परामर्श दिया है, वैसा ही मैं करूँगा। आपके प्रवचन से मेरी बुद्धि और भी बढ़ गई है। ऐसा कहकर राजा युधिष्ठिर ने तद्नुसार कार्य किया और इस प्रकार उन्हें समुद्रपर्यन्त पृथ्वी का राज्य प्राप्त हो गया॥128॥
 
Yudhishthira said, "Devrishi! I will do as you have advised me. My wisdom has increased even more due to your discourse. Saying this, King Yudhishthira acted accordingly and thus he got the kingdom of the earth up to the sea.॥ 128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)