श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  2.5.126 
षडनर्था महाराज कच्चित् ते पृष्ठत: कृता:।
निद्राऽऽलस्यं भयं क्रोधोऽमार्दवं दीर्घसूत्रता॥ १२६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! क्या आपने निद्रा, आलस्य, भय, क्रोध, कठोरता और विलंब - इन छः दोषों को त्याग दिया है?॥126॥
 
Maharaj, have you left behind (given up) these six faults - sleep, laziness, fear, anger, harshness and procrastination?॥ 126॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)