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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  2.5.116 
कच्चित् ते पुरुषा राजन् पुरे राष्ट्रे च मानिता:।
उपानयन्ति पण्यानि उपधाभिरवञ्चिता:॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके शहर और देश में उन व्यापारियों का सम्मान है और वे उपयोगी सामान बेचते हैं, है ना? क्या आपके कर्मचारी उन्हें धोखा देते हैं?
 
Maharaj! Those merchants are respected in your city and nation and bring useful goods for sale, right? Do your employees cheat them?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)