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mahabharat 2.5.113: नारदजी बोले - "हे राजन! अग्निहोत्र से वेदों की सिद्धि होती है, दान और भोग से धन की प्राप्ति होती है, स्त्री का फल मैथुन और पुत्र की प्राप्ति है तथा शास्त्रज्ञान का फल चरित्र और सदाचार है।" ॥113॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.5.113 
नारद उवाच
अग्निहोत्रफला वेदा दत्तभुक्तफलं धनम्।
रतिपुत्रफला दारा: शीलवृत्तफलं श्रुतम्॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - "हे राजन! अग्निहोत्र से वेदों की सिद्धि होती है, दान और भोग से धन की प्राप्ति होती है, स्त्री का फल मैथुन और पुत्र की प्राप्ति है तथा शास्त्रज्ञान का फल चरित्र और सदाचार है।" ॥113॥
 
Narada said, "O King! The success of the Vedas is achieved through Agnihotra, wealth is achieved through charity and enjoyment, the fruit of a woman is sex and the birth of a son, and the fruit of knowledge of scriptures is character and good behaviour." ॥113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)