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एतया वर्तमानस्य बुद्धॺा राष्ट्रं न सीदति।
विजित्य च महीं राजा सोऽत्यन्तसुखमेधते॥ १०४॥
अनुवाद
ऐसी बुद्धि के अनुसार आचरण करने वाले पुरुष का राष्ट्र कभी संकटग्रस्त नहीं होता। वह राजा सम्पूर्ण जगत् को जीत लेता है और दिन-प्रतिदिन बड़े सुख से उन्नति करता है ॥104॥
The nation of one who behaves according to such wisdom never faces any crisis. That king conquers the entire world and prospers day by day with great happiness. ॥ 104॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥