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mahabharat 2.5.101: क्या तुम जातिबंधुओं, गुरुजनों, वृद्धजनों, देवताओं, तपस्वियों, पीपल आदि चैत्यवृक्षों और कल्याणकारी ब्राह्मणों को नमस्कार करते हो? 101॥   |   mahabharat अध्याय 2.5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  2.5.101 
कच्चिज्ज्ञातीन् गुरून् वृद्धान् दैवतांस्तापसानपि।
चैत्यांश्च वृक्षान् कल्याणान् ब्राह्मणांश्च नमस्यसि॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
क्या तुम जातिबंधुओं, गुरुजनों, वृद्धजनों, देवताओं, तपस्वियों, पीपल आदि चैत्यवृक्षों और कल्याणकारी ब्राह्मणों को नमस्कार करते हो? 101॥
 
Do you salute caste brothers, teachers, old men, gods, ascetics, Chaitya tree (peepal) etc. and welfare Brahmins? 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)