श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 5: नारदजीका युधिष्ठिरकी सभामें आगमन और प्रश्नके रूपमें युधिष्ठिरको शिक्षा देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.5.1 
वैशम्पायन उवाच
अथ तत्रोपविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु।
महत्सु चोपविष्टेषु गन्धर्वेषु च भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! एक दिन महाबली पाण्डव अन्य महापुरुषों तथा गन्धर्वों आदि के साथ उस सभा में बैठे हुए थे॥1॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! One day the great Pandava was sitting in that assembly along with other great men and Gandharvas etc.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)