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श्लोक 2.49.7  |
यद्यनेन हतो बाल्ये शकुनिश्चित्रमत्र किम्।
तौ वाश्ववृषभौ भीष्म यौ न युद्धविशारदौ॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्म! यदि उन्होंने बचपन में ही पक्षी (बकासुर) को अथवा अश्व (केशी) और बैल (अरिष्टासुर) नामक पशुओं को मार डाला, जो युद्धकला से सर्वथा अनभिज्ञ थे, तो इसमें आश्चर्य क्या है?॥ 7॥ |
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| Bhishma! What is surprising if in his childhood he killed a bird (Bakasur) or the animals named horse (Keshi) and bull (Arishtasur) who were totally ignorant of the art of war?॥ 7॥ |
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