श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 49: शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.49.5 
अवलिप्तस्य मूर्खस्य केशवं स्तोतुमिच्छत:।
कथं भीष्म न ते जिह्वा शतधेयं विदीर्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! तुम्हें अपने ज्ञान का बड़ा अभिमान है, परन्तु वास्तव में तुम बड़े मूर्ख हो! हे! इस केशव की स्तुति करते ही तुम्हारी जीभ सैकड़ों टुकड़ों में क्यों नहीं टूट जाती?॥5॥
 
Bhishma! You are very proud of your knowledge, but in reality you are a big fool! Oh! Why doesn't your tongue break into hundreds of pieces as soon as you wish to praise this Keshav?॥ 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas