'हंस! तुम्हारा अन्तःकरण आसक्ति आदि विकारों से दूषित है। तुम्हारा यह अण्डे खाने जैसा अपवित्र कार्य तुम्हारे धर्मोपदेश के सर्वथा विरुद्ध है।'॥40॥
'Hans! Your inner soul is polluted with the evils of attachment and other vices. This unholy act of yours like eating eggs is totally against your words of preaching Dharma.'॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि शिशुपालवधपर्वणि शिशुपालवाक्ये एकचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत शिशुपालवधपर्वमें शिशुपालवाक्यविषयक इकतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४१॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ४१ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)