श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 49: शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.49.4 
पूतनाघातपूर्वाणि कर्माण्यस्य विशेषत:।
त्वया कीर्तयतास्माकं भूय: प्रव्यथितं मन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आपने श्रीकृष्ण के पूतना-वध आदि कार्यों का जो विशेष वर्णन किया है, उससे हमारे मन को पुनः बड़ी ठेस पहुँची है। ॥4॥
 
The special description you have given of Sri Krishna's actions such as killing of Putana etc. has once again caused a great hurt to our mind. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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