श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 49: शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  2.49.38-39 
ते त्वां हंससधर्माणमपीमे वसुधाधिपा:।
निहन्युर्भीष्म संक्रुद्धा: पक्षिणस्तं यथाण्डजम्॥ ३८॥
गाथामप्यत्र गायन्ति ये पुराणविदो जना:।
भीष्म यां तां च ते सम्यक् कथयिष्यामि भारत॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तुम भी उस हंस के समान हो, इसलिए ये सभी राजा अत्यन्त क्रोधित होकर आज तुम्हें उसी प्रकार मार डालेंगे, जैसे उन पक्षियों ने हंस को मार डाला था। भीष्म! इस विषय में पुराणों के विद्वान् पुरुष एक कथा गाते हैं। हे भरत रत्न! मैं तुम्हें वह कथा बहुत अच्छी तरह सुनाता हूँ। 38-39।
 
You are also like that swan, therefore all these kings will be very angry and will kill you today in the same manner as those birds killed the swan. Bhishma! On this subject the learned men of Puranas sing a story. O jewel of the Bharata clan! I will narrate that to you very well. 38-39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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